आरटीआई आवेदक को लट्टू की तरह नचा रहे जीडीए प्रवर्तन जोन दो के अधिकारी, आठ माह पूर्व प्रेषित की गई आरटीआई से संबंधित प्रपत्रों को आवेदक के कई प्रयासों के बावजूद देने के लिये नही हैं तैयार।

 


डाटला एक्सप्रेस संवाददाता 

आवेदक द्वारा प्रेषित चारों आरटीआई प्रवर्तन जोन दो के अवर अभियंताओं के संरक्षण मे हुए अवैध निर्माणों से जुड़े होने के चलते अधिकारी प्रपत्रों को उपलब्ध करवाने मे कर रहे हैं संकोच

आरटीआई नियमों की धज्जियां उड़ाने, अवैध निर्माणों और काॅलोनियों को संरक्षण देने के लिये मशहूर गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण का प्रवर्तन जोन 02 हमेशा सुर्खियों मे बना रहता है। जोन मे तैनात अवर अभियंताओं और सुपरवाइज़र्स की मेहरबानी से आज प्रवर्तन जोन दो अवैध कालोनी बसाने वाले लोगों और अवैध निर्माणकर्ताओं के लिये एक स्वर्ग सा बना हुआ है। सरकार/विभाग और आम लोगों को दिखाने और अवैध निर्माणों के विरुद्ध बेहतर कार्यवाही का दिखावा करने के लिये इनका बुल्डोजर दस्ता कभी-कभार किसी अवैध कालोनी की चारदीवारी को गिरा वाह-वाही लूटने का प्रयास करता रहता है, हाँ वह बात अलग है कि आज पूरा प्रवर्तन जोन दो अवैध निर्माणों का गढ़ बना हुआ है जहां चारों ओर जहां भी नज़र जाए इनके अवर अभियंताओं के संरक्षण से फलत-फूलती अवैध कॉलोनीयां और उनमें हो रहे अवैध निर्माण आसानी से देखने को मिल जाएंगे। 

इन्हीं अवैध निर्माणों और अवैध काॅलोनियों की जानकारी को प्राप्‍त करने के उद्देश्य से आरटीआई आवेदक श्री रोशन कुमार राय द्वारा दिनांक 13.06.2022 से 14.06.2022 के बीच कुछ बिंदुओं को इंगित करते हुए चार आरटीआई गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन 02 मे प्रेषित की गई थीं। जिनकी सूची कुछ इस प्रकार से है (1)-आरटी आवेदन प्राप्त संख्या 30546 दिनांक 13.06.2022 सूचना पत्र पत्रांक संख्या 935/प्रवर्तन जोन-2/08.08.2022 (2):-आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30547 दिनांक 13.06.2022 सूचना पत्र संख्या 934/प्रवर्तन जोन-2/08.08.2022 (3):-आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30586 दिनांक 14.06.2022 सूचना पत्र पत्रांक संख्या 907/प्रवर्तन जोन-2/18.07.2022 (4):-आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30588 दिनांक 14.06.2022 सूचना पर पत्रांक संख्‍या 953/प्रवर्तन जोन-2/17.08.2022। 

आवेदक द्वारा प्रेषित इन चार आरटीआई के सूचना पत्रों जिनकी जानकारी ऊपर दी गई है के क्रम मे सूचना अधिकारी प्रवर्तन जोन-2 द्वारा प्रत्येक आरटीआई संख्या 30546 के तीन बिंदुओं मे से बिंदु संख्या तीन, आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30547 के समस्त तीनों बिंदुओं, आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30586 के तीन बिंदुओं मे से बिंदु संख्या तीन, आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30588 के चार बिंदुओं मे से बिंदु संख्या दो से संबंधित जवाबों को प्राप्त करने के लिये किसी भी कार्यदिवस पर प्राधिकरण मे उपस्थित हो निर्धारित शुल्क जमा करवाते हुए आवश्यकता अनुसार प्रपत्रों की छायाप्रतियां प्राप्त करने के लिये कहा गया था। जबकि आवेदक द्वारा प्रेषित की गई चारों आरटीआई मे स्पष्ट रूप से एक निश्चित तिथि के बीच की समस्त पत्रावलियों को प्राप्त करने का आवेदन किया गया था जिसमें आवेदक को पत्रावलियों का अवलोकन करवा आवश्यकता अनुसार प्रपत्रों को उपलब्ध करवाने का कोई अर्थ ही नही बनता यह तो बस आरटीआई आवेदक को परेशान करने का प्रयास भर है। 

आवेदक द्वारा भेजे गए कई रिमाइंडर लैटर्स के बावजूद अधिकारियों ने साध रखी है चुप्पी

आरटीआई आवेदक द्वारा प्रेषित चारों आरटीआई से संबंधित प्रपत्रों को प्राप्त करने के लिये प्राधिकरण कोष मे जमा की जाने वाली कुल धनराशि की जानकारी को प्राप्‍त करने के लिये कई अनुस्मारक व प्रार्थना पत्र प्रवर्तन जोन 02 मे भेजे गए जिनकी सूची कुछ इस प्रकार से है (1)-दिनांक 14.06.2022 रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU131287598IN (2)-दिनांक 06.10.2022 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU131310186IN पत्रांक संख्या RTI.GDA.EZONE2.01.2022 श्रीमान जनसूचना अधिकारी प्रवर्तन जोन दो को प्रेषित (3)-दिनांक 08.02.2023 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU033284469IN पत्रांक संख्या RTI.जीडीए.प्रवर्तन जोन 02.सूचना अधिकारी.01.2023 श्रीमान जनसूचना अधिकारी प्रवर्तन जोन दो को प्रेषित (4)-दिनांक 08.02.2022 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU033284472IN पत्रांक संख्या RTI.जीडीए.प्रवर्तन जोन दो.उपाध्यक्ष.01.2023 श्रीमान उपाध्यक्ष महोदय को प्रेषित (5)-दिनांक 28.02.2023 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU611488245IN पत्रांक संख्या RTI.उपाध्यक्ष.GDA.03.2023 श्रीमान उपाध्यक्ष जी को प्रेषित (6)-दिनांक 28.02.2023 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU611488360IN पत्रांक संख्या RTI.GDA.PIO.ENFORCEMENT ZONE 02.02.2023 श्रीमान जनसूचना अधिकारी प्रवर्तन जोन दो को प्रेषित कुल छः अनुस्मारक अब तक भेजे जा चुके हैं जिस पर आरटीआई आवेदक को जोन 02 के अधिकारियों द्वारा कोई प्रतिक्रिया नही दी गई जो आरटीआई नियमों के प्रति प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों की विशेष गंभीरता को दर्शाता के लिये काफी है। 

प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा आवेदक को दस्तावेज उपलब्ध करवाने को दिये गए थें आदेश, लेकिन फिर भी नही रेंगी किसी के कान पर जूँ

आरटीआई से संबंधित अनुस्मारकों पर प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों द्वारा कोई प्रतिक्रिया ना दिये जाने से परेशान आरटीआई आवेदक ने जवाबों को प्राप्त करने के लिये प्रथम अपीलीय अधिकारी गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण श्री सी0पी0 त्रिपाठी (अपर सचिव) के समक्ष चार प्रथम अपीलें प्रस्तुत की जिनकी सूची कुछ इस प्रकार से है (1):-आरटी प्राप्ति संख्या 30546 दिनांक 13.06.2022 पर दायर प्रथम अपील संख्या 272/2022 पत्रांक संख्या 1846/ज0सू0-प्र0अ0/RTI/13/01/2023 (2):-आरटीआई प्राप्ति संख्या 30547 दिनांक 13.06.2022 पर दायर प्रथम अपील संख्या 273/2022 पत्रांक संख्या 1847/ज0सू0-प्र0अ0/RTI/13.01.2023 (3):आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30586 दिनांक 14.06.2022 पर दायर प्रथम अपील संख्या 264/2022 पत्रांक संख्या 1844/ज0सू-प्र0अ0/RTI/13.01.2023 (4):-आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30588 दिनांक 13/01/2023 पर दायर प्रथम अपील संख्या 1843/ज0सू0-प्र0अ0/RTI/13.01.2023 की सुनवाईयों मे प्रथम अपीलीय अधिकारी महोदय द्वारा प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों को मुझे पत्रावलियों का अवलोकन करवाते हुए निर्धारित शुल्क जमा करवा आरटीआई से जुड़े प्रपत्रों को 15 दिवस के भीतर मुझे उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था, परंतु प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों को नज़र अंदाज करते हुए जोन 02 के अधिकारियों द्वारा आवेदक को कोई सूचना मुहैया नही करवाई गई। 

जनशिकायत पर प्रभारी प्रवर्तन जोन 02 द्वारा प्रपत्रों को प्राप्‍त करने का दिया जा चुका है आदेश

आरटीआई आवेदक द्वारा उक्त मामले से संबंधित एक जनशिकायत संख्या 40014022039448 दिनांक 29.09.2022 को मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल पर भी दर्ज करवाई गई थी जिसमें प्रभारी प्रवर्तन जोन 02 द्वारा प्रेषित आख्या पत्रांक संख्या 1052/प्रवर्तन जोन दो/14.10.2022 मे आवेदक को प्राधिकरण कोष मे निर्धारित शुल्क जमा करवा प्रपत्रों को प्राप्त करने के लिये कहा गया किंतु प्रेषित आख्या मे भी प्रभारी महोदय द्वारा कुल प्रपत्रों की संख्या व प्राधिकरण कोष मे जमा की जाने वाली कुल धनराशि का कही भी जिक्र नही किया जिससे समझा जा सकता है कि आवेदक को किस प्रकार जानबूझकर परेशान करने की नीयत से प्रपत्रों व धनराशि का कही जिक्र नही किया गया, तत्पश्चात आवश्यकता ना होने पर भी आवेदक द्वारा दिनांक 08.02.2023 को प्राधिकरण कोष मे 20 रू का अवलोकन शुल्क यह सोचते हुए जमा करवा दिया गया कि शायद अब प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारी इन चारों आरटीआई के प्रति कुछ गंभीरता दिखाएं, किंतु अपनी सुस्त कार्यप्रणाली, आरटीआई नियमों का मजाक बनाने, अवैध निर्माणों से जुड़ी जनशिकायतों पर झूठी एवं भ्रामक आख्याएं प्रेषित करने और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के लिये मशहूर अवैध काॅलोनियों से सराबोर जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों ने आवेदक को आठ माह पूर्व प्रेषित की गई आरटीआई से जुड़े प्रपत्रों को देने के लिये प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर लगवाने शुरू कर दिये और आज दिन तक आवेदक को कुल प्रपत्रों और उन्हें प्राप्‍त करने के लिये प्राधिकरण कोष मे जमा करवाने वाली कुल धनराशि से अवगत नही करवाया गया, इन सभी बातों को देखते हुए आरटीआई आवेदक के पास अब द्वितीय अपील प्रस्तुत करने के अलावा और कोई रास्ता नही बचा, क्यूंकि उन्होंने हर स्तर पर प्रयास करके देख लिया किन्तु जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारी इन चारों आरटीआई से जुड़े प्रपत्रों को देने के लिये तैयार नही हैं, जवाबों को प्राप्त करने के इतने प्रयासों और उन पर कोई प्रतिक्रिया ना करने को देख एक बार को शायद द्वितीय अपीलीय अधिकारी भी अचंभित रह जाए कि जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों का आरटीआई कानून के प्रति कितनी गंभीरता है। 

अगर दिया जवाब तो पूर्व मे हुए कई अवैध निर्माणों की खुल सकती है पोल पट्टी

आवेदक का कहना है कि उनके द्वारा प्रेषित चारों आरटीआई जीडीए प्रवर्तन जोन 02 मे तैनात अवर अभियंताओं के संरक्षण से पूर्व मे हुए कई अवैध निर्माणों से जुड़े होने के चलते अधिकारी प्रपत्रों को उपलब्ध करवाने से आज दिन बचते आए हैं, क्यूंकि उन्हें भी पता है कि यदि वह आवेदक को दस्तावेज उपलब्ध करवाते हैं तो पूर्व मे इनके अवर अभियंताओं के संरक्षण से फलेफूले कई अवैध निर्माणों और अवैध काॅलोनियों की पोल-पट्टी खुल जाएगी, ऐसे मे यह चारों आरटीआई उनके गले की हड्डी बनी हुई है, आरटीआई आवेदक का यह भी कहना है कि वह द्वितीय अपील मे तो जाएंगे ही इसके विपरित जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों की इस सुस्त कार्यप्रणाली और आरटीआई नियमों को धज्जियां उड़ाते हुए आरटीआई आवेदक को परेशान करने के इस प्रकरण की शिकायत पत्राचार के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, आवास एवं शहरी नियोजन मंत्री, मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन, मंडलायुक्त मेरठ मंडल और जिलाधिकारी गाज़ियाबाद को भेजी जा रही हैं। 

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