अवैध निर्माणों को संरक्षण देना हो या आरटीआई नियमों की धज्जियां उड़ाना, जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारी दोनों चीजों मे हैं माहिर।


आरटीआई आवेदकों को जीडीए का चक्कर लगवाने, जनशिकायत पर झूठी आख्याएं प्रेषित करने और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने मे प्रथम रैंकिंग हासिल कर चुका है जीडीए का प्रवर्तन जोन 02

डाटला एक्सप्रेस संवाददाता

गाज़ियाबाद:-सबसे अधिक अवैध निर्माणों और अनाधिकृत काॅलोनियों से भरपूर गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण का प्रवर्तन जोन दो और इसमे तैनात अधिकारी आरटीआई कानून को भी अपने जूतों की नोंक पर रखते हैं। अवैध निर्माणों और निर्माणकर्ताओं पर लगाम लगाने मे हमेशा से ही असफल रहे इनके अवर अभियंताओं और दिन भर क्षेत्र मे घूम-घूम कर अवैध निर्माणों की जानकारी देने का जिम्मा लिये इनके सुपरवाइज़रों के संरक्षण से आज पूरा प्रवर्तन जोन 02 अनाधिकृत कॉलोनीयों, अवैध निर्माणों, अवैध मार्केट्स, स्कूल्स, बैंक्वेट हाॅल्स, हॉस्पिटल्स आदि से पटा पड़ा है। जो अवैध निर्माण इन अवर अभियंताओं के संरक्षण से पूरे कर लिये गए उन्हें तो कोई पूछने वाला नही, ताज्जुब तो यह है कि जीडीए उच्चाधिकारियों की लाख कोशिशों के बावजूद वर्तमान मे हो रहे अनगिनत अवैध निर्माणों और धड़ल्ले से काटी जा रही अनाधिकृत काॅलोनियों अंकुश नही लगाया जा सका है या यूं कहें कि जानबूझकर नहीं लगाया जा रहा है। नतीजतन प्राधिकरण को शमन/जुर्माने आदि शुल्कों प्राप्‍त होने वाले राजस्व मे प्रत्येक वर्ष भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

अगर कोई व्यक्ति अपने वर्षों पूर्व बने मकान की छत पर एक कमरा बनाने लगे तो इनके सुपरवाइज़र्स तड़ा तड़ मौके पर पहुंच कर अगर मामला मौके पर ना निपटा तो उसे धारा 27 के तहत प्रपत्र 'ब' (कारण बताओ नोटिस) थमा कार्यालय आकर सक्षम अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने के लिये कह नोटिस थमा जाते हैं और दूसरी ओर बड़े बिल्डरों द्वारा मानचित्र स्वीकृति के नाम पर किये जा रहे अवैध निर्माण और अवैध काॅलोनियों के विकासकर्ता इनकी नजरों से छुप जाए ऐसा हो ही नही सकता। और इन अवैध निर्माणों का इतना विशेष संरक्षण क्यूँ दिया जाता है यह कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ सकता है। 

यदि कोई व्यक्ति, पत्रकार, वकील, सामाजिक संस्था आदि द्वारा इन अवैध निर्माणों या अवैध काॅलोनियों की शिकायत की जाती है तो जांच आख्या मे अधिकतर यही लिखा पाया जाता है कि उ.प्र नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कार्यवाही की गई है, अवैध निर्माण पुलिस अभिरक्षा मे है, अवैध निर्माण से संबंधित वाद न्यायलय मे लंबित है, अवैध निर्माण मौके पर सील बंद है, अवैध निर्माणकर्ता के विरुद्ध थाने मे प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है आदि। कुछ मौकों पर तो शिकायतों पर प्रेषित आख्या मे शिकायतकर्ता को ही ब्लैकमेलर, पूर्वाग्रह ग्रसित, आदि शिकायतकर्ता बता अपनी खीझ निकालते हुए शिकायत का निस्तारण कर दिया जाता है। यदि पिछले 10 बर्षों मे अवैध निर्माणों से जुड़ी जनशिकायतें जो प्राधिकरण को प्राप्त हुई हो फिर चाहे उसमे प्रवर्तन जोन 02 या कोई भी जोन, 90 फीसदी शिकायतों मे आपको इसी प्रकार की आख्या देखने को मिलेगी। इन्हीं भ्रामक आख्याओं की आड़ में अवैध निर्माणकर्ता अपने निर्माण को पूरा कर लेता है और अनाधिकृत कॉलोनीयों के विकासकर्ता पूरी कॉलोनी काट कर मौके से निकल जाते हैं। 

कुछ ऐसे ही अवैध निर्माणों और अवैध काॅलोनियों की जानकारी को प्राप्‍त करने के उद्देश्य से आरटीआई आवेदक श्री रोशन कुमार राय द्वारा दिनांक 13.06.2022 से 15.06.2022 के बीच कुछ बिंदुओं को इंगित करते हुए पांच आरटीआई गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन 02 मे प्रेषित की गई थीं। जिनकी सूची कुछ इस प्रकार से है (1)-आरटी आवेदन प्राप्त संख्या 30548 दिनांक 13.06.2022 सूचना पत्र पत्रांक संख्या 888/प्रवर्तन जोन-2/16.07.2022 (2):-आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30596 दिनांक 15.06.2022 सूचना पत्र संख्या 936/प्रवर्तन जोन-2/08.08.2022 (3):-आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30597 दिनांक 15.06.2022 सूचना पत्र पत्रांक संख्या 887/प्रवर्तन जोन-2/16.07.2022 (4):-आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30599 दिनांक 15.06.2022 सूचना पर पत्रांक संख्‍या 952/प्रवर्तन जोन-2/17.08.2022 (5):-आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30600 दिनांक 15.06.2022 सूचना पत्र संख्या 937/प्रवर्तन जोन-2/08.08.2022।। 

आवेदक द्वारा प्रेषित इन पांचों आरटीआई के सूचना पत्रों जिनकी जानकारी ऊपर दी गई है के क्रम मे सूचना अधिकारी प्रवर्तन जोन-2 द्वारा प्रत्येक आरटीआई संख्या 30548 के तीन बिंदुओं मे से बिंदु संख्या दो व तीन, आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30596 के समस्त तीनों बिंदुओं, आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30598 के चार बिंदुओं मे से बिंदु संख्या दो व तीन, आरटीआई आवेदन प्राप्त संख्या 30599 के तीन बिंदुओं मे से बिंदु संख्या एक व तीन एवं आरटीआई प्राप्त आवेदन संख्या 30600 के दोनों बिंदुओं से संबंधित जवाबों को प्राप्त करने के लिये किसी भी कार्यदिवस पर प्राधिकरण मे उपस्थित हो निर्धारित शुल्क जमा करवाते हुए आवश्यकता अनुसार प्रपत्रों की छायाप्रतियां प्राप्त करने के लिये कहा गया था। जबकि आवेदक द्वारा प्रेषित की गई पांचो आरटीआई मे स्पष्ट रूप से एक निश्चित तिथि के बीच की समस्त पत्रावलियों को प्राप्त करने का आवेदन किया गया था, उस हिसाब आवेदक को पत्रावलियों का अवलोकन करवा आवश्यकता अनुसार प्रपत्रों को उपलब्ध करवाने का कोई अर्थ ही नही बनता यह तो बस आरटीआई आवेदक को परेशान करने का प्रयास भर है। 

आवेदक द्वारा भेजे गए कई रिमाइंडर लैटर्स के बावजूद अधिकारियों ने साध रखी है चुप्पी

आरटीआई आवेदक द्वारा प्रेषित चारों आरटीआई से संबंधित प्रपत्रों को प्राप्त करने के लिये प्राधिकरण कोष मे जमा की जाने वाली कुल धनराशि की जानकारी को प्राप्‍त करने के लिये कई अनुस्मारक व प्रार्थना पत्र प्रवर्तन जोन 02 मे भेजे गए जिनकी सूची कुछ इस प्रकार से है (1)-दिनांक 14.06.2022 रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU131287598IN (2)-दिनांक 06.10.2022 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU131310186IN पत्रांक संख्या RTI.GDA.EZONE2.01.2022 श्रीमान जनसूचना अधिकारी प्रवर्तन जोन दो को प्रेषित (3)-दिनांक 08.02.2023 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU033284469IN पत्रांक संख्या RTI.जीडीए.प्रवर्तन जोन 02.सूचना अधिकारी.01.2023 श्रीमान जनसूचना अधिकारी प्रवर्तन जोन दो को प्रेषित (4)-दिनांक 08.02.2022 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU033284472IN पत्रांक संख्या RTI.जीडीए.प्रवर्तन जोन दो.उपाध्यक्ष.01.2023 श्रीमान उपाध्यक्ष महोदय को प्रेषित (5)-दिनांक 28.02.2023 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU611488245IN पत्रांक संख्या RTI.उपाध्यक्ष.GDA.03.2023 श्रीमान उपाध्यक्ष जी को प्रेषित (6)-दिनांक 28.02.2023 को रजिस्टर्ड पोस्ट संख्या RU611488360IN पत्रांक संख्या RTI.GDA.PIO.ENFORCEMENT ZONE 02.02.2023 श्रीमान जनसूचना अधिकारी प्रवर्तन जोन दो को प्रेषित कुल छः अनुस्मारक अब तक भेजे जा चुके हैं जिस पर आवेदक को जोन 02 के अधिकारियों द्वारा कोई प्रतिक्रिया नही दी गई, जो आरटीआई नियमों के प्रति प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों की विशेष गंभीरता को दर्शाता के लिये काफी है। 

जनशिकायत पर प्रभारी प्रवर्तन जोन 02 द्वारा प्रपत्रों को प्राप्‍त करने का दिया जा चुका है आदेश

आरटीआई आवेदक द्वारा उक्त मामले से संबंधित एक जनशिकायत संख्या 40014022039448 दिनांक 29.09.2022 को मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल पर भी दर्ज करवाई गई थी जिसमें प्रभारी प्रवर्तन जोन 02 द्वारा प्रेषित आख्या पत्रांक संख्या 1052/प्रवर्तन जोन दो/14.10.2022 मे आवेदक को प्राधिकरण कोष मे निर्धारित शुल्क जमा करवा प्रपत्रों को प्राप्त करने के लिये कहा गया किंतु प्रेषित आख्या मे भी प्रभारी महोदय द्वारा कुल प्रपत्रों की संख्या व प्राधिकरण कोष मे जमा की जाने वाली कुल धनराशि का कही भी जिक्र नही किया जिससे समझा जा सकता है कि आवेदक को किस प्रकार जानबूझकर परेशान करने की नीयत से प्रपत्रों व धनराशि का कही जिक्र नही किया गया, तत्पश्चात आवश्यकता ना होने पर भी आवेदक द्वारा दिनांक 08.02.2023 को प्राधिकरण कोष मे 20 रू का अवलोकन शुल्क यह सोचते हुए जमा करवा दिया गया कि शायद अब प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारी इन चारों आरटीआई के प्रति कुछ गंभीरता दिखाएं, किंतु अपनी सुस्त कार्यप्रणाली, आरटीआई नियमों का मजाक बनाने, अवैध निर्माणों से जुड़ी जनशिकायतों पर झूठी एवं भ्रामक आख्याएं प्रेषित करने और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के लिये मशहूर अवैध काॅलोनियों से सराबोर जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों ने आवेदक को आठ माह पूर्व प्रेषित की गई आरटीआई से जुड़े प्रपत्रों को देने के लिये प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर लगवाने शुरू कर दिये और आज दिन तक आवेदक को कुल प्रपत्रों और उन्हें प्राप्‍त करने के लिये प्राधिकरण कोष मे जमा करवाने वाली कुल धनराशि से अवगत नही करवाया गया, इन सभी बातों को देखते हुए आरटीआई आवेदक के पास अब द्वितीय अपील प्रस्तुत करने के अलावा और कोई रास्ता नही बचा, क्यूंकि उन्होंने हर स्तर पर प्रयास करके देख लिया किन्तु जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारी इन पांचो आरटीआई से जुड़े प्रपत्रों को देने के लिये तैयार नही हैं, जवाबों को प्राप्त करने के इतने प्रयासों और उन पर कोई प्रतिक्रिया ना करने को देख एक बार को शायद द्वितीय अपीलीय अधिकारी भी अचंभित रह जाए कि जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों का आरटीआई कानून के प्रति कितनी गंभीरता है। 

जो दे दिये जवाब तो खुल ना जाए अवैध निर्माणों की पोल पट्टी

आवेदक द्वारा प्रेषित पांचो आरटीआई जीडीए प्रवर्तन जोन 02 मे तैनात अवर अभियंताओं के संरक्षण से पूर्व मे हुए कई अवैध निर्माणों से जुड़ी होने के चलते अधिकारी प्रपत्रों को उपलब्ध करवाने से आज दिन बचते आए हैं, क्यूंकि उन्हें भी पता है कि यदि वह आवेदक को दस्तावेज उपलब्ध करवाते हैं तो पूर्व मे इनके अवर अभियंताओं के संरक्षण से फलेफूले कई अवैध निर्माणों और अवैध काॅलोनियों की पोल-पट्टी खुल सकती है, ऐसे मे यह पांचो आरटीआई उनके गले की हड्डी बनी हुई है, आरटीआई आवेदक का कहना है कि वह द्वितीय अपील मे तो जाएंगे ही साथ ही साथ जीडीए प्रवर्तन जोन 02 के अधिकारियों की इस सुस्त कार्यप्रणाली और आरटीआई नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए आरटीआई आवेदक को प्रकार परेशान करने के इस प्रकरण की शिकायत पत्राचार के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, आवास एवं शहरी नियोजन मंत्री उ.प्र, मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन उ.प्र, मंडलायुक्त मेरठ मंडल उ.प्र और जिलाधिकारी गाज़ियाबाद उ.प्र को भेजी जा रही हैं। 

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