नंद नगरी थाने के सुन्दर नगरी टोल टैक्स पिकेट पर तैनात पुलिसकर्मी धृतराष्ट्र की भूमिका मे, नहीं दिखाई देता अतिक्रमण।












(पुलिस पिकेट से मात्र 100 मीटर की दूरी पर लगवाई जा रही हैं 70 से 80 अवैध दुकानें, पुलिस ने आखों पर बांधी पट्टी और साध लिया है मौन)

डाटला एक्सप्रेस संवाददाता 

अतिक्रमण एक ऐसी चुनौती है जिससे दिल्ली/एनसीआर के लोगों को रोज़ाना जुझना पड़ता है। अवैध रिक्शा/ऑटो स्टैंड, पैदल पथों पर लगी ठेलियां और छोटी/बड़ी अवैध दुकानें आम राहगीरों के लिये उनकी रोजमर्रा की बातें हैं, क्यूंकि उन्हें पता है कि चाहे कितनी भी शिकायत क्यूँ ना कर लो चाहे दिल्ली नगर निगम हो या फिर पुलिस विभाग किसी के कानों पर जूँ नही रेंगने वाली, और अगर रेंगी होती तो आज दिल्ली के कुछ खास (पाॅश) हिस्सों को छोड़ पूरी दिल्ली अतिक्रमण की चपेट मे नही होती।

कुछ ऐसा ही मामला पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी थाना अंतर्गत आने वाले सुंदर नगरी टोल टैक्स पर बनी पुलिस पिकेट का भी है, सुंदर नगरी टोल टैक्स के पार दिल्ली की सीमा मे नंद नगरी थाने के अंतर्गत मात्र 100 मीटर दूरी पर हर्ष विहार जेल के ठीक सामने मेन रोड पर किसी व्यक्ति (नाम अज्ञात) द्वारा 60 से 70 अवैध दुकानें फुटपाथ पर लगवा दिल्ली पुलिस की पोल खोली जा रही है। यहां बात पिकेट की हो रही है, किंतु ताज्जुब यह है कि जिस जगह पर यह सभी दुकानें लगवाई जा रही हैं वहां से नंद नगरी थाना मात्र 1 किलोमीटर की ही दूरी पर है, बावजूद इसके केवल इस वर्ष नहीं अपितु कई वर्षो से नवंबर, दिसम्बर व जनवरी माह मे यह दुकानें लगाई जाती रही हैं, जिस पर समय-समय पर तैनात रहे पुलिसकर्मियों या नंद नगरी थाने मे तैनात किसी पुलिस अधिकारी द्वारा कोई भी कार्यवाही नही कि गई, जो दिल्ली पुलिस की कार्य प्रणाली को उजागर करता ह। 

इन्हीं दुकानों के संचालकों मे से एक संचालक ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि जिस व्यक्ति द्वारा इन सभी दुकानों को लगवाया जा रहा है वह रोज़ाना प्रत्येक दुकानदार से 250, 300 और 400 रू तक (दुकान की साइज़ के अनुसार) वसूलता है जिसमें सभी का हिस्सा होता है, यहां हम किसी हिस्सेदार का नाम नही ले रहे बस इतना कहेंगे कि समझदार को इशारा ही काफी होता है। 

जनहित को देखते हुए हमारे द्वारा मामले की शिकायत दिल्ली पुलिस कमिश्नर सहित जोनल पुलिस अधिकारियों से से की जा रही है।

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