ग़ज़ल:-झरते हो हरदम

प्रस्तुति डाटला एक्सप्रेस 


किस से डरते हो हरदम

ना ना करते हो हरदम

साफ कहो जी क्यों छुपकर

आहें भरते हो हरदम

प्यार नहीं तो आँखों से

काहे झरते हो हरदम

बोलो किस से मिलने को

आप सँवरते हो हरदम

बिन कारण तन्हा रहकर

मीत बिखरते हो हरदम

दूरी का इल्ज़ाम मगर

हम पर धरते हो हरदम

ऐसी पाक मुहब्बत में

किसे अखरते हो हरदम

अंचल कठिन पहेली से

आप गुजरते हो हरदम



ममता शर्मा (राजस्थान)7220004040

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