जीडीए उपाध्यक्ष की कोशिशों पर भारी साबित हो रहा अवैध निर्माणकर्ताओं का मनोबल

भ्रष्टाचार मामला गाज़ियाबाद विकास प्राधिकार, प्रवर्तन जोन 07

डाटला एक्सप्रेस संवाददाता

(जोन अभियंताओं एवं निर्माणकर्ताओं की सांठ-गांठ के चलते जीडीए उपाध्यक्ष की सारी कोशिशे हो रही हैं बेकार)

(प्रवर्तन जोन 07 में हो रहे हैं सबसे अधिक अवैध निर्माण, निर्माणकर्ताओं को जीडीए का कोई भय नहीं)

(अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के चलते पूर्व में कई अवर अभियंताओं व सुपरवाइज़र्स पर भी गिर चुकी है गाज)

गाज़ियाबाद:-कोरोना महामारी के चलते मई माह में लगे आंशिक लॉकडाउन की वजह से आमों-खास सभी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। जून माह में प्रदेश सरकार द्वारा लोगों से कोरोना महामारी के लिये बनाये गये नियमों का पालन करने की शर्त पर लाॅकडाउन से दी गई छूट के बाद आर्थिक परिस्थितियों में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है।  

हाउसिंग सैक्टर देश का एक बहुत बड़ा और महंगा सैक्टर है। गत् वर्ष कुछ महीनों व इस वर्ष मई माह में लगे लॉकडाउन की वजह से निर्माण कार्य रुक जाने के कारण इस सैक्टर को काफी ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। जून के महीने में लाॅकडाउन खुलने के बाद से ही इस सैक्टर ने पुनः अपनी रफ्तार को पकड़ लिया है और बहुत तेजी से रुके हुए सभी निर्माण कार्य पूरे किये जा रहे हैं।

दूसरी ओर दुर्भाग्यवश जितना भ्रष्टाचार इस सैक्टर में देखने को मिलता है उतना दूसरे किसी अन्य में नहीं।विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा अपनी शह पर निर्माण मानकों के विपरीत निर्माण को पूरा करवा कर अपनी जेबों को भरने के मामले बहुत आम हो गये हैं।विभागों में बैठे अधिकारियों को निर्माणकर्ताओं से प्राप्त होने वाली भारी भरकम रिश्वत उनके मुँह और कलम पर ताले जड़ देती है। 

अवैध निर्माण को संरक्षण देने से संबंधित एक ऐसा ही मामला गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन 07 (सात) अंतर्गत आने वाली राजेंद्र नगर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। जिसमें जोन के अभियंताओं कि शह पर भारी मात्रा में अवैध निर्माण हो रहे हैं। ऐसा नहीं कि इसकी भनक जोन 07 के प्रभारी को नहीं है।क्यूंकि उक्त क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माणों की शिकायतें उन्हें निरंतर प्राप्‍त हो रही हैं, बावजूद इसके उनके द्वारा अब तक कोई भी उचित ज़मीनी कार्यवाही अवैध निर्माणों के विरुद्घ देखने को नहीं मिल पाई है। हाँ कागज़ों में देखा जाये तो इस क्षेत्र में हो रहा लगभग हर निर्माण मौके पर सील और पुलिस अभिरक्षा में होगा, परंतु मौके पर वह सारे निर्माण निर्माणकर्ताओं द्वारा दोगुनी रफ्तार से पूरे किये जा रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कई हाउसिंग अपार्टमेंट में बने फ्लैटों को निर्माणकर्ताओं द्वारा बेचा जा चुका है और कइयों के बयाने जीडीए से बिना पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त लिये ही किये जा चुके हैं व किये जा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि कहीं न कहीं इन अवैध निर्माणों को प्रवर्तन जोन सात के प्रभारी का पूरा-पूरा संरक्षण प्राप्त है। 

राजेंद्र नगर क्षेत्र में हो रहे कुछ अवैध निर्माण 

अवैध निर्माणों के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं

(1)प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत मानचित्र के बिल्कुल विपरीत किया गया व निरंतर किया जा रहा है निर्माण 

(2)-एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ाते खुले में हो रहा है अवैध निर्माण।

(3) एफएआर एवं सेट-बैक नियमों का किया गया है उल्लंघन यानि निर्धारित से अधिक क्षेत्र को कवर करके किया गया है निर्माण।

(4)निर्धारित से कई गुना अधिक छज्जों की चौड़ाई जो चित्र में साफतौर पर देखी जा सकती है। 

(5)-बिना आदेश किया गया व जा रहा हैं अवैध भू-जल दोहन।

(6) स्वीकृत मानचित्र से किये गये अतिरिक्त निर्माण के आधे से भी कम का किया गया है शमन।

(7) बिना पूर्णता प्रमाण पत्र के रजिस्ट्री और बयाने चालू 

(8)तय से अधिक फ्लोर्स एवं यूनिट्स का किया गया है निर्माण। 

(9)पार्किंग एरिया में किया जा रहा है निर्माण। 

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन सात (07) के भ्रष्टाचार की कहानियां किसी से छुपी हुई नहीं है। न जाने कितनी ही बार अवैध निर्माणों को अपनी शह देने के चलते कई अवर अभियंता और सुपरवाइजर्स सस्पेंड हो चुके हैं। बावजूद इसके यह अपनी कारस्तानीयों से बाज नहीं आते और निरंतर अवैध निर्माणों को अपनी शह प्रदान कर उन्हें पूरा करवाते हैं। जिससे राज्य सरकार को प्रत्येक वर्ष इन निर्माणों के शमन शुल्क आदि से प्राप्त होने वाली भारी भरकम राशि का नुकसान उठाना पड़ता है। परंतु प्रवर्तन जोन सात के अभियंताओं को इन सब बातों से कोई मतलब नहीं उन्हें केवल अपनी जेबें भरने भर से मतलब है। यदि कोई शिकायत करें तो यह शिकायतकर्ता को पूर्वाग्रह से ग्रसित और ब्लैक-मेलर तक बताते हैं। लेकिन यह नहीं बताते कि आखिर इन्होंने ऐसा क्या किया या छुपाया है जिसके लिये यह ब्लैक मेल हो रहे हैं।

इनके द्वारा शिकायतों पर आख्या लगाने के दूसरे तरीके कुछ इस प्रकार भी होते हैं जैसे कि उक्त अवैध निर्माण के खिलाफ दायर वाद न्यायालय में लंबित है, उक्त निर्माण को सील कर पुलिस अभिरक्षा में दे दिया गया है, निर्माण को सील बंद किया जा चुका है आदि। जबकि मौके पर ऐसा कुछ नहीं होता यह सब केवल काग़ज़ी कार्यवाहियां या दिल्ली की भाषा में बोले तो हवाई फायरिंग होती हैं जो अवैध निर्माणों को पूरा करवाने में इन्हें सहायता प्रदान करती हैं। असल में अवैध निर्माणों को पूरा करवाने के लिए यह लोग एक सिस्टम से काम करते हैं जिसमें सबसे पहले अवैध निर्माणों के खिलाफ न्यायालय में वाद दाखिल कर दिखावटी सिलिंग की कार्यवाही करते हुए संबंधित थाने को उक्त निर्माण की शिकायत दे निर्माण को अपनी अभिरक्षा में लेने के लिए कहा जाता है जिसकी आड़ में निर्माणकर्ता अभियंताओं के संरक्षण में बिना किसी रोक टोक के अपना निर्माण पूरा करता है। बाकी बची यह सब कागज़ी कार्यवाहियां इन अभियंताओं को निर्माणों के विरुद्ध प्राप्त होने वाली जन-शिकायतों का निस्तारण करने में सहायता प्रदान करती हैं।उदहारण के लिये जैसे कोई व्यक्ति किसी अवैध निर्माण के संबंध में शिकायत करता है तो यह कुछ इस प्रकार से अपनी आख्या प्रस्तुत करते हैं कि उक्त निर्माण के विरुद्ध दायर वाद न्यायालय में लंबित है एवं निर्माण को सील बंद कर पुलिस अभिरक्षा में दे दिया गया है।जबकि ऐसा होता नहीं है कागजों में सील निर्माण मौके पर धीरे-धीरे बन कर तैयार हो जाता है।

प्रवर्तन जोन सात अंतर्गत आने वाले सभी क्षेत्रों जैसे सूर्यनगर, चंद्रनगर,ब्रिज विहार, रामप्रस्थ, लाजपत नगर, राजेन्द्र नगर, श्याम पार्क, शालीमार गार्डन एक्सटेंशन 02 व गणेशपुरी में ऐसे ही अन्य सैकड़ों अवैध निर्माण जोन अभियंताओं के संरक्षण में चालू हैं, जिन्हें जल्द प्रकाश में लाया जायेगा।

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