वरिष्ठ दलित लेखक मामचंद रिवाड़िया की आत्मकथा 'मेरा जीवन संघर्ष' का लोकार्पण व चर्चा।

प्रस्तुति डाटला एक्सप्रेस/रिपोर्ट हीरालाल राजस्थानी

दिनांक 18 जुलाई 2021 रविवार को मामचंद रिवाड़िया मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में दलेस के वरिष्ठ सदस्य माननीय मामचंद रिवाड़िया के 86 वें जन्मदिन के अवसर पर उनकी आत्मकथा 'मेरा जीवन दर्शन' का लोकार्पण व चर्चा का आयोजन आंबेडकर आश्रम, टैगोर गार्डन दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. धनीराम आंबेडकर ने उन्हें बधाई देकर आगे उनके इस पुस्तक चर्चा में कहा कि यह गर्व करने जैसा अनुभव है। रिवाड़िया जी के जीवन से बहुत कुछ सीखने व समझने की जरूरत है।इस कार्यक्रम के मुख्यातिथि हीरालाल राजस्थानी ने अपने वक्तव्य में उन्हें जन्मदिवस की बधाई देते हुए कहा कि मामचंद जी उन चंद लोगों में से एक है जिन्होंने बाबा साहब डॉ. आंबेडकर से अपनी किशीरावस्था में उनसे भेंट की तथा वे जिस दलित जाति खटीक समाज से आते हैं। उस समाज के किसी लेखक की यह पहली आत्मकथा है। मुझे खुशी है कि मामचंद जी मेरे आग्रह पर यह जीवन गाथा लिखने में कामयाब रहे। इससे आने वाले भविष्य में इस समाज के लोग जान पाएंगे की कैसे इनका जीवन संघर्ष यहां तक पहुंचा। निस्संदेह ही उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व से समाज को लाभ प्राप्त होगा। दलेस की उपाध्यक्ष चंद्रकांता सिवाल ने मामचंद जी की आत्मकथा की सराहना करते हुए कहा कि यह दलित समाज के लिए प्रेरणादायक जीवनी साबित होगी। सुनीता राजस्थानी, अमित धर्म सिंह, गीता दलित लेखक संघ के सदस्य मौजूद थे। उन्होंने शाल, पुस्तक व अनेक उपहार देकर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर अशोक निर्वाण, संजय चौहान, नेतराम ठगेला, एडवोकेट प्रमोद बंसल, सरदार रविरंजन सिंह, अनिल सरवालिया,ओमप्रकाश बोलीवाल जी, मुकेश राजोरा व उनके परिवार में उनके बेटे बिटिया, पौत्र पोत्री और उनकी पत्नी कोशल्या रिवाड़िया भी मौजूदगी उत्साहपूर्ण वातावरण बनाने में अहम भूमिका निभा रहे थे।

मंचसंचालन कर रहे गोपाल प्रसाद ने मामचंद जी की पुस्तक के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा। अंत में मामचंद रिवाड़िया जी ने ये कहकर सभी का धन्यवाद प्रकट किया कि इस जीवन को लिखवाने का श्रेय हीरालाल राजस्थानी जी को जाता है जिन्होंने मुझे अपनी आत्मकथा लिखने के लिए निरंतर प्रेरित ही नहीं किया बल्कि समय समय पर आकर संज्ञान भी लेते रहे। मैं उनका सदैव आभारी रहूंगा।

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