गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के उद्यान अनुभाग अंतर्गत आने वाले सिटी फॉरेस्ट के वाहन पार्किंग स्थल पर तैनात कर्मी जीडीए द्वारा निर्धारित वाहन पार्किंग मूल्य हेतु टिकट पर अंकित मूल्य से अधिक ले रहे हैं पैसे।

 


डाटला एक्सप्रेस संवाददाता/

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गाज़ियाबाद:-आपको बताते चलें कि हमारे अखबार को काफी समय से इस आशय शिकायत आ रही थी कि सिटी फॉरेस्ट गाज़ियाबाद जो गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के उद्यान अनुभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है की दुपहिया वाहन पार्किंग एरिया में तैनात कर्मचारी वाहन मालिकों से उनके दुपहिये को पार्क करने के लिए टिकट पर अंकित 11.80 (ग्यारह रुपये अस्सी पैसे) रू से अधिक मूल्य 20 से 25 रुपये ले रहे हैं। 

आप सोच रहे होंगे कि 5 या 10 रुपये से क्या फर्क़ पड़ जाता है, लेकिन आपको यह मालूम होना चाहिए कि सिटी फॉरेस्ट में रोजाना हज़ारों की संख्या में लोग आते हैं, यदि एक व्यक्ति से 10 रू अधिक लिए गए तो ज़रा सोचें कि यह लोग दिन भर में कितनी बड़ी मात्रा में उगाही करते होंगे। अनुमानित 10 से 20 हज़ार रुपये रोज़ाना। अब शायद आपको यह बात बड़ी लग रही होगी। यदि कोई वाहन स्वामी इस बारे में पार्किंग कर्मचारियों से पूछता है तो उनका कहना होता है कि हमे आगे भी देना पड़ता है ऐसा कह वह लोगों को चलता कर देते हैं।इस बात का मतलब यह है कि उन्हें अपने ऊपर बैठे अधिकारी तक इन पैसों को पहुंचाना होता है। वैसे जीडीए के उद्यान अनुभाग के भ्रष्टाचारों की बातें किसी से भी नहीं छुपी, यह तो बहुत ही आम सी बात है। 

खैर मामले की सच्चाई जानने के लिए हमारे अखबार के संवाददाता श्री सौरभ वशिष्ठ सच्चाई जानने के लिए मौके पर सिटी फॉरेस्ट पर दिनांक:-09/02/2021 दिन मंगलवार समय तकरीबन दोपहर 2 से 2:30 बचे के बीच गए तो वह यह देख कर हैरान रह गए कि कैसे 11.80 रू वाली पार्किंग टिकट के लिए उनसे 20 रू ले लिए गए और हेल्मेट रखवाने के 10 रु अलग से जिसका जिक्र पार्किंग की पर्ची पर कहीं भी नहीं था यानी कुल 30 रू। 

30 रू का भुगतान करने के बाद जब हमारे संवाददाता ने अपनी पहचान उजागर की तो पार्किंग पर मौजूद कर्मचारी जिन्होंने ना तो जीडीए की यूनीफॉर्म पहनी थी और ना ही किसी प्रकार बैच या नेम टैग लगाया था का कहना जो बहुत ही आश्चर्य और चिंताजनक है कि कोई भी आए सबको इतना ही देना पड़ता है।जब हमारे संवाददाता ने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होनें अपना नाम बताने से भी साफ इंकार कर दिया। 

अब आप ज़रा सोचे की जब एक पत्रकार जो अपनी पहचान भी उजागर कर दे तब भी उससे मूल्य से अधिक भुगतान ले लिया जाए तो एक आम आदमी के प्रति इन कर्मचारियों का क्या व्यावहार होता होगा जो आज की भ्रष्टाचार विरोधी राज्य सरकार की छवि के लिए काफी अहितकारी है।

इस प्रकार की हिम्मत किसी कर्मचारी में तभी आ सकती है जब उसके ऊपर बैठा उसका अधिकारी उसकी इन कारस्तानीयों में पूरा सहयोगी हो। वैसे जीडीए में इस प्रकार की उगाही का मामला कोई नया नहीं है। अखबारों में आए दिन जीडीए अधिकारियों-कर्मचारियों की ऐसे कारनामें के चर्चे सुर्खियों में आते रहते हैं।

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