संस्कार भारती साहित्य की भव्य काव्य संध्या "राष्ट्र को नमन''


डाटला एक्सप्रेस 
datlaexpress@gmail.com
 
हापुड़: 73 वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में संस्कार भारती साहित्य की एक जिला काव्य संध्या का आयोजन पिलखुवा के मुखर्जी पुस्तकालय एवम् वाचनालय में किया गया। यह आयोजन राष्ट्र को समर्पित एक अद्भुत कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम का शुभारम्भ पिलखुवा की कवयित्री बीना गोयल ने माँ शारदा की वंदना से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉक्टर वागीश दिनकर ने की उन्होंने अपने काव्य पाठ में कहा.... 


"शत्रु ने इस बार बन मदहोश यदि की छेड़खानी,
सदा को मिट जाएगी नापाक शैतानी कहानी। 


वरिष्ठ कवि चंद्र भानु मिश्र ने पढ़ा... 


जन्नत क्यों ढूँढ़ते हो मंदिरों में मस्जिदों में तुम,
बस एक बार खेतों में हल चलाकर देखें।


अतिथि कवि के रूप में पधारे दरियाव सिंह राजपूत ब्रजकन ने काव्य पाठ कुछ ऐसे किया..... 


"गगन उनका नहीं होता जो तारे टिमटिमाते हैं, 
वतन उनका ऋणी,जो देश पर सर्वस्व लुटाते हैं।


कार्यक्रम के संयोजक व जिला साहित्य संयोजक कवि अशोक गोयल ने अपनी रचना को कुछ ऐसे प्रस्तुत की 


"आतंकी हमलों की ज्वाला दिल में मेरे जलती है, 
इसीलिए तो कलम मेरी कागज पर आग उगलती है।


कवि दिनेश त्यागी ने पढ़ा..... 


"तीर चलाकर एक तुम करते तीन शिकार।
ट्रम्प चचा तो रो रहे पाक हुआ लाचार।


कवयित्री बीना गोयल ने पढ़ा..... 


"नौजवानों उन्हें याद कर लो जरा जो शहीद हो गए इस वतन के लिए।" कवि नरेश सागर ने पढ़ा...."तीन सौ सत्तर हट गई हंसा खूब कश्मीर"। कवि राज कुमार सिसौदिया ने पढ़ा.... "सीमा पे जवानों की जब बोलती बंदूक तो, सारे नेताओं को सियासी भाषा छोड़ देनी चाहिए।" पंडित शिव प्रकाश शर्मा ने पढ़ा...."मन के अब दरवाजे खोलो, मन के सब दरवाजे खोलो" कवि मोहित शौर्य ने पढ़ा...." भोले नाथ के बच्चे हम प्याले विष के" कवि इसहाक अली सुंदर ने पढ़ा.... "ये वतन है भगत सिंह-अशफ़ाक़ का" कवि आशीष भारद्वाज ने पढ़ा...." नेहरू और अब्दुल्ला की इक भूल भयंकर साल गई"। कवयित्री क्षमा पंडित ने पढ़ा...."सौगंध नहीं गीता की ली पर मैनें मन में ठाना है"
 
इनके अतिरिक्त ग़ज़लकार राजीव सिंघल,जमशेद माहिर, गंगाशरण शर्मा,प्रशांत कुमार, मोनू राणा, सौरभ राणा, दाऊद खान आदि ने भी राष्ट्र को समर्पित रचना पढ़ी। कार्यक्रम में मुकेश वर्मा, सत्यप्रकाश गुप्ता,संजय अग्रवाल, प्रतीक गुप्ता, सुनील कुमार, आशु व नगर से अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सुंदर संचालन कवि अशोक गोयल व कवयित्री बीना गोयल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में गाज़ियाबाद, मोदीनगर, सिंभावली, गढ़ मुक्तेश्वर, पिलखुवा, हापुड़,नोएडा आदि जगहों से आये रचनाकारों ने अपनी अपनी रचनाएं पढ़ीं।


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