'माँ नर्मदा' जी की जयंती पर 'निहाल छीपा' की एक कविता

'माँ नर्मदा'
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मात नर्मदे तुम कल्याणी,
कृपा कीजिये हे! मगरवाहिनी ।
तुम हो माता पतितपावनी,
तुम हो माता मोक्षदायिनी ।।१।।


तुम मेकलसुता हो प्यारी,
तुम शिवनन्दिनी हो दुलारी ।
तुम गणेश कार्तिक की बहना प्यारी,
तुम भक्तजनों की हो महतारी ।।२।।


माता तेरे अनेक नाम है,
सुरसा, रेवा, कृपा नाम हैं ।
माता तेरे अनेक धाम हैं,
सबसे प्यारा अमरकण्ठ धाम हैं ।।३।।


तेरे जल में जलचर रहते,
तेरे तट पर थलचर रहते ।
तेरे जल का कल-कल स्वर हैं,
तेरे तट का कण कण शिव हैं।।४।।


माघ शुक्ल सप्तमी अवतरित भई हो,
भोले के स्वेद से उत्पन्न भई हो ।
रूप शोभा नीलाम्बर वारि,
भक्तजनों की सुनती मनुहारी ।।५।।


दुग्धधार की महिमा प्यारी ,
कपिलधार लागे मनोहारी ।
रेवा कुण्ड की छटा निराली,
माई की बगिया में विराजने वाली ।।६।।


भेंड़ाघाट स्थली अनुपम सुंदर ,
ओंकारेश्वर में रमते शंकर ।
बम-बम कहते नर नारी ,
गुण गाथा गाते त्रिपुरारी ।।७।।


पंचकोशी यात्रा भक्तजन करते ।
नर्मदे हर कहकर सरे भरते ।
नर-नारी तेरे घाट सपरते ।
धर्मी-अधर्मी सब ही तरते ।।८।।


मैया तुम हो कष्टहारिणी,
भयहारिणी मंगलकारिणी ।
पापनाश करें पापनाशिनी ,
पुण्य प्रदान करें पुण्यदायिनी।।९।।


दास 'निहाल' हैं निराभिमानी ,
क्षमा कीजिये हे ! मात भवानी ।
दु:ख हरिये हे ! दु:खहारिणी ,
कृपा कीजिये हे ! जगदम्बा भवानी ।।१०।।


मात नर्मदे तुम कल्याणी,
कृपा कीजिये हे ! मगरवाहिनी ।।
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निहाल छीपा "नवल"/गाड़रवारा
प्रस्तुति: डाटला एक्सप्रेस 8/2/2019


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