कविता-याद मे छुप कर

डाटला एक्सप्रेस की प्रस्तुति 


कब मिलोगे बोलिए जी

चुप जुबां को खोलिए जी

याद में छुप कर बहुत दिन

अब बहुत दिन रो लिए जी

क्यों बसे आकर ज़हन में

क्यों तसव्वुर हो लिए जी

है अगर हमसे मुहब्बत

लफ़्ज़ से रस घोलिए जी

है जरूरत एक हां की

शब्द भी क्या सो लिए जी

कर सके पूरे न वादे

दोस्त खुद को तोलिए जी

देखिए हमने नयन भी

आंसूओ से धो लिए जी।।।।



ममता शर्मा 'अंचल' (अलवर "राजस्थान") 

Comments
Popular posts
मशहूर कवि डॉ विजय पंडित जी द्वारा रचित रचना "सुरक्षित होली प्रदूषणमुक्त होली"
Image
भक्त कवि श्रद्धेय रमेश उपाध्याय बाँसुरी की स्मृति में शानदार कवि सम्मेलन का किया गया आयोजन।
Image
भारतीय किसान यूनियन "अंबावता" द्वारा ओला वृष्टि से हुए किसानों के नुकसान पर मुआवजा देने के लिए राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन।
Image
अलवर राजस्थान की सुप्रसिद्ध एवं वरिष्ठ कवि ममता शर्मा 'अंचल' द्वारा रचित रचना "बंजारे दिल का"
Image
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की छत्रछाया में अवैध फैक्ट्रियों के गढ़ गगन विहार कॉलोनी में हरेराम नामक व्यक्ति द्वारा पीतल ढलाई की अवैध फैक्ट्री का संचालन धड़ल्ले से।
Image