अनाधिकृत रूप से विकसित राधेश्याम विहार फेस 05 कॉलोनी, बन चुकी है जीडीए प्रवर्तन जोन अभियंताओं के उगाही का अड्डा
डाटला एक्सप्रेस संवाददाता/8800201131/rairoshan695@gmail.com 

गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन तीन अंतर्गत गाज़ियाबाद मेरठ हाइवे पर दुहाई क्षेत्र में आने वाले पेरीफेरल एक्सप्रेस वे से आगे दाहिनी ओर सीएनजी गैस स्टेशन के पास राधेश्याम विहार फेस 05 नामक अनाधिकृत कॉलोनी का विकास और निर्माण प्रवर्तन जोन 03 अभियंताओं के आशीर्वाद से वर्षों से चला आ रहा है। उक्त कॉलोनी कई हज़ार वर्ग गज में फैली हुई है। जिसमें 25 से लेकर 500 गज तक के सैकड़ों प्लॉट कॉलोनी के विकासकर्ता द्वारा अब तक काटे व बेचे जा चुके हैं। जिनमें से तकरीबन 150 प्लॉट्स पर निर्माणकर्ताओं द्वारा पूरी तरह अवैध निर्माण किये जा चुके हैं, और कइयों पर प्रवर्तन जोन 03 अभियंताओं के आशीर्वाद से अवैध निर्माण अब भी चालू हैं। 

यदि कोई प्रवर्तन जोन तीन के अवर अभियंताओं या प्रभारी से इस विषय में पूछें तो शायद वह अपनी संलिप्तता इस कॉलोनी के विकास में होने से मना कर दें, परंतु ऐसा नहीं है। उदाहरण के लिये कोई व्यक्ति अपने पूर्व निर्मित मकान में गलती से एक छज्जा भी डालता मिल जाये तो इनका बुलडोजर दस्ता उसे तोड़ने पहुंच जाता है, तो क्या इतनी बड़ी कॉलोनी बिना इनकी जानकारी के इतने वर्षों से विकसित होती आई और इन्हें पता भी नहीं चला। उक्त कॉलोनी मेन गाज़ियाबाद मेरठ हाइवे पर स्थित है जिसमें गत् कई वर्षों से इसके विकासकर्ता छोटे-बड़े कई प्लॉट्स को काट कर बेच चुके है। जिनमें 150 से अधिक प्लॉट्स पर भवन बन कर तैयार भी हो चुके हैं। दूसरी बात इस अनाधिकृत कॉलोनी के शुरुआती विकास से अब तक अनेकों शिकायतें भी प्रवर्तन जोन तीन को प्राप्‍त हो चुकी है। परंतु जोन के अवर अभियंताओं एवं जांच अधिकारी (प्रवर्तन प्रभारी) द्वारा कॉलोनी के विकासकर्ता व निर्माणकर्ताओं के बीच सांठ-गांठ के चलते आज दिन तक उक्त कॉलोनी के विरुद्ध कोई उचित डिमोलिशिंग या सीलिंग की कार्यवाही नहीं हो पाई। वैसे तो जीडीए के फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जाकर देखें, तो रोज कहीं ना कहीं इनका बुल्डोजर गाज़ियाबाद के किसी दूर दराज स्थित गांव में कोई 25 या 50 गज के प्लॉट पर हो रहे अवैध निर्माण को ध्वस्त कर उसकी तस्वीरें कुछ अखबारों में प्रकाशित करवा भू-माफियाओं, अनाधिकृत कॉलोनी के विकासकर्ताओं व अवैध निर्माणकर्ताओं के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने की डींगे हांकता रहता है। परंतु यहां ज़मीनी सच्चाई इसके बिल्कुल विपरित है, दरअसल प्रवर्तन जोन 03 के अभियंताओं जैसे ही कुछ भ्रष्‍ट अधिकारियों के संरक्षण से आज पूरे गाज़ियाबाद जनपद में ऐसी ही सैकड़ों अवैध कॉलोनीयां कट कर विकसित हो गई और आज भी तेजी हो रही हैं।इसी प्रकार उक्त राधेश्याम कॉलोनी फेस 05 भी वर्षों से निरंतर विकसित होती आ रही है और आज भी तेजी से विकसित हो रही है।

उक्त राधेश्याम कॉलोनी फेस 05 के संबंध में कुछ क्षेत्रीय लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि, जब किसी प्लॉट पर निर्माणकर्ता द्वारा निर्माण को शुरू किया जाता है तो उसके कुछ समय पश्चात प्रवर्तन जोन तीन जीडीए से कोई कर्मचारी निर्माणकर्ता को आकर कारण बताओ नोटिस थमा देता है, जिसमें फला दिन और समय पर प्राधिकरण में आ सक्षम अधिकारी के समक्ष (उक्त क्षेत्र/सबजोन का कार्य देख रहे अवर अभियंता) उपस्थित हो जवाब देने को कहा जाता है कि क्यूँ नहीं उसके निर्माण को सील या ध्वस्त कर दिया जाये, यानी निर्माणकर्ता पर एक प्रकार का मानसिक दबाव बनाया जाता है। खैर जब निर्माणकर्ता तय समय पर प्राधिकरण में डरा-सहमा पहुंचता है तो उसके साथ क्षेत्रीय अवर अभियंता द्वारा उसकी स्थिति का फायदा उठाते हुए जो कि प्लॉट के साइज और उसके कुल फ्लोर्स पर निर्भर करती है के आधार पर अंडर टेबल भारी लेन देन किया जाता है। जो 10 से लेकर 1 लाख रू या उससे भी अधिक हो सकता है। जिसके पश्चात निर्माणकर्ता को पूरी तरह बिना मानचित्र पास करवाये निर्माण करने के लिये मुक्त कर दिया जाता है। कुछ इसी प्रकार कॉलोनी के विकासकर्ता का भी प्लॉट के साइज के आधार पर रेट तय किया हुआ है।

आज कुछ ऐसा ही हाल पूरे जोन में हर तरफ बड़ी ही आसानी से देखने को मिल सकता है, जिसमें जोन के भीतर बैठे कुछ ऐसे भ्रष्‍ट अभियंताओं के चलते ऐसी अनाधिकृत कॉलोनीयां आज तेजी से विकसित हो रही हैं। जिसके कारण राज्य सरकार को शमन आदि शुल्कों से होने वाली कमाई का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, हमारे द्वारा ऐसी ही अन्य अनाधिकृत कॉलोनीयों की जानकारियां एकत्रित की जा रही हैं, जिन्हें जल्द प्रकाश में लाया जायेगा।
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