जनहित में की गई शिकायतों का मखौल बनाते हुए उनपर झूठी आख्यायें प्रेषित करने में माहिर हैं अधिशासी अभियंता राजीव आर्य

 


डाटला एक्सप्रेस संवाददाता

(अपने मातहतों के भ्रष्टाचारी गतिविधियों पर पर्दा डालने में राजीव आर्य को हासिल है महारथ)

(जनहित का नहीं है ध्यान, सरकार,विभाग और आम जनता की आंखों में झोंक रहे हैं धूल)

विद्युत वितरण खंड 04(चार) "गाजियाबाद" के साहिबाबाद डिवीजन चार राजेंद्र नगर में तैनात अधिशासी अभियंता राजीव आर्य अपनी पद की ताक़त और उसकी गरिमा को धूमिल करते हुए जनहित को ध्यान में रखकर की गई शिकायतों पर अति भ्रामक, हास्यास्पद एवं झूठी आख्यायें प्रेषित कर राज्य सरकार, विभाग एवं आम जनता की आंखों में धूल के साथ-साथ मिर्च भी झोंक रहे हैं। जिससे भ्रष्टाचार विहीन राज्य सरकार की के साथ विभाग की भी छवि धूमिल हो रही है। 

इसी क्रम में आपको अवगत कराते चले की विद्युत वितरण खंड 04 "गाज़ियाबाद" के साहिबाबाद में तैनात अधिशासी अभियंता राजीव आर्य ने खुद को ही सर्वे-सर्वा मान लिया है। शिकायतों पर झूठी आख्या प्रेषित करने से लेकर अपने मातहतों के भ्रष्टाचारी गतिविधयों पर पर्दा डालने तक का ठेका  अधिशासी अभियंता राजीव आर्य ने लिया हुआ है। कुछ एक ऐसा ही मामला मैं प्रकाश में लाना चाहता हूं, जिसमें हमारे द्वारा पूर्व में दिनांक 05/10/2020 को सन्दर्भ संख्या 40014020033020 के मध्यमा से जनहित को ध्यान में रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया था कि अधिशासी अभियंता द्वारा रिहायशी इलाक़ों में इंडस्ट्रीयल कनेक्शन ना दिये जाने के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए राजीव कॉलोनी साहिबाबाद गाज़ियाबाद आनंद धाम सोसाइटी के बराबर में 23 किलो वाट का भारी-भरकम इंडस्ट्रियल कनेक्शन दे दिया गया। जिसे भरपूर विद्युत आपूर्ति देने के लिए अलग से खासकर एक ट्रांसफार्मर भी लगाया गया था।

अग्निश्‍मन से संबंधित मामले को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड "गाज़ियाबाद" की ओर परिवर्तित कर शिकायत पर प्रेषित कर दी झूठी आख्या

पूर्व में की गई शिकायत में बताया गया था कि घनी आबादी के बीच इस फैक्ट्री के होने से कभी भी आग लगने जैसी कोई बड़ी घटना घटित हो सकती है। शिकायत में प्रदूषण फैलाने का कहीं से कहीं तक जिक्र भी नहीं किया गया था। किसी 10 वर्ष के बच्चे से भी पूछें कि क्या प्लास्टिक काटने या जलाने से प्रदूषण होता है। तो वह भी बता देगा कि जलाने से ही प्रदूषण होता है। क्यूंकि इस फैक्ट्री में प्लास्टिक कटिंग का काम होता है तो प्रदूषण की समस्या कहा से होगी। तो ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अनापत्ति प्रमाण पत्र तो दे ही देगा। परंतु अग्निश्‍मन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र कहाँ है। जिसकी सबसे अधिक आवश्यकता इस कनेक्शन को देने के लिए थी। उसका मिस्टर आर्य द्वारा शिकायत पर प्रेषित आख्या में रेष मात्र भी जिक्र ना करते हुए सरकार, विभाग और आम जनता को गुमराह करने के लिये बहुत ही भ्रामक और हास्यास्पद आख्या प्रस्तुत कर दी गई। 

आपको बताते चलें की उक्त संस्थान बहुत ही ज़्यादा आबादी वाली राजीव कॉलोनी और एक ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के पास स्थापित है।जिसकी वजह से कभी भी आग लगने के कारण कोई बहुत बड़ा हादसा हो सकता है जिसमें कई मासूम ज़िन्दगीयों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है।मामले की गम्भीरता और आग लगने जैसी कोई अप्रिय घटना से होने वाले भारी नुकसान को बहुत ही भली-भाँति जानते हुए भी भला क्यूँ राजीव आर्य द्वारा इतना बड़ा इंडस्ट्रियल कनेक्शन दे दिया गया और यदि वह नहीं जानते थे जो कि नामुमकिन है क्यूंकि वहीं इस जोन के जवाबदेह अधिकारी है। तो भला उन्होंने खुद को और इस फैक्ट्री को बचाते हुए यह झूठी आख्या कैसे प्रेषित कर डाली। अगर भविष्य में कोई दुर्घटना हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, मिस्टर का क्या है उनका आज नहीं तो कल कहीं दूसरी जगह तबादला हो जाएगा। 

इस तरह जाँच अधिकारी अधिशासी अभियंता राजीव आर्य की अकर्मण्यता और शासन द्वारा जारी आदशों-उपदेशों की उनके द्वारा अवहेलना उन्हें एक आपराधिक साजिशकर्ता और दुराग्रही साबित करती है। जिसके लिए वह दण्ड का हकदार हैं। सरकार और न्याय की नैसर्गिक विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए इस हाई प्रोफाइल भ्रष्टाचार(साठगांठ) एवं उगाही लेकर आज भी इतने बड़े इन्डस्ट्रीयल कनेक्शन को घनी आबादी वाले क्षेत्र में संचालित रहने देने , झूठी तथा अधूरी जाँच रिपोर्ट लगाकर शासन और जनता को गुमराह करने के प्रकरण पर मिस्टर आर्य जैसे उच्चाधिकारियों द्वारा पर्दा डालने के मामले की जाँच एवं कार्रवाई बहुत अधिक आवश्यक है।

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