एसडीओ किशन कुमार उड़ा रहे हैं सरकार के नियमों की धज्जियां 


(अपने स्वयं की कमाई के चक्कर में नई बलेनो गाड़ी खरीद बिजली विभाग का कैश लाने-लेजाने में कर रहे हैं ईस्तेमाल) 


 


(गाड़ी को बिजली घर के प्राइवेट लड़कों से चलवाया जाता है, किसी घटना के बाद कौन होगा जिम्मेवार)


 


गाजियाबाद विद्युत विभाग का साहिबाबाद जोन आए दिन किसी ना किसी भ्रष्टाचार मामले को लेकर चर्चा में बना रहता है।एसडीओ, अवर अभियंताओं तथा प्राइवेट व सरकारी लाइन मैनों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रो में चलाए जा रहे उगाही सिंडिकेटो तथा नए-नए तरीकों से उपभोक्ताओं को परेशान करने आदि जैसी समस्याओं को लेकर तमाम समाज सेवियो एवं उपभोक्ताओं द्वारा पूर्व में अनगिनत शिकायतें की जाती रही हैं। आए दिन विभिन्न समाचार पत्रों में विद्युत विभाग के साहिबाबाद जोन में हो रहे भ्रष्टाचारों की ख़बरें प्रकाशित होती रहती हैं बावजूद इसके उच्चाधिकारी हमेशा बहुत ही नर्म रुख दिखाते हुए अपने मातहतों का बचाव करते देखे जाते हैं जिससे भ्रष्‍ट अधिकारियों-कर्मचारियों का हौसला सातवे आसमान पर रहता है परंतु उच्चाधिकारियों आम लोगों के दुख-तकलीफों से कोई वास्ता नहीं होता। 


 


इसी क्रम में गुप्त सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारीनुसार ऐसा ही एक और मामला सामने आया है जिसमें राजेंद्र नगर बिजली घर पर तैनात एसडीओ किशन कुमार जो अपने कारनामों के कारण हमेशा चर्चा में बने रहते हैं द्वारा सरकारी नियमों-कायदों तथा दिशा-निर्देशों कि खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। 


 


आपको बता दें की सरकार के दिशा निर्देशनुसार बिजली विभाग के किसी भी अधिकारी को वाहन मुहैया कराने के लिए किसी बड़ी फर्म को टेंडर दिया जाता है जिसमें वह फर्म अपने वाहनों द्वारा अधिकारियों को लाने-लेजाने और विभागीय कार्यों को करने के लिए फर्म के नाम से रजिस्टर्ड वाहन विभाग को मुहैया कराते हैं जिसकी एवज में विद्युत विभाग द्वारा टेंडर प्राप्त रजिस्टर्ड फर्म को वाहन और ड्राइवर का पूरा भुगतान हर महीने की एक निश्चित तारीख को कर दिया जाता है। 



यह वही बलेनो गाड़ी है जो एसडीओ किशन कुमार द्वारा विभागीय कार्यों के लिए ईस्तेमाल में लाई जा रही है 


 


वहीं दूसरी ओर एसडीओ किशन कुमार द्वारा सरकारी नियमों को ताक पर रखकर एक ऐसा षड्यंत्र रचा गया है जिसमें उन्होंने फर्जी तरीके से विभाग को वाहन सेवा देने के लिए किसी फर्म के नाम को रजिस्टर्ड करा कर अपनी प्राइवेट बलेनो गाड़ी जिसका नंबर UP-14-EL-1981 है जिसपर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ है को विभागीय कार्यों जैसे चीफ इंजीनियर, अधीक्षण अभियंता कार्यालयों आदि जगहों पर जाने अथवा साइड पर किसी काम को देखने जाने के लिए ईस्तेमाल किया जा रहा है। सबसे ज्यादा गंभीर विषय यह है कि वह अपने इसी निजी वाहन का ईस्तेमाल कोयल एनक्लेव बिजली घर व राजेंद्र नगर बिजली घर पर इकट्ठा हुए कैश को बैंक ले जाने में करवा रहे हैं। इस गाड़ी पर उन्होंने कोई ड्राइवर नहीं रखा है बल्कि नकद पैसा लाने-लेजाने के लिए वह किसी प्राइवेट संविदा कर्मी को अपनी बलेनो गाड़ी लेकर बैंक भेज देते हैं जिसे औचक निरीक्षण कर किसी भी जांच अधिकारी द्वारा राजेंद्र नगर बिजली घर पर बड़े ही आसानी से देखा जा सकता है। 


 


इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आपको एक और बात से अवगत करा दें जिसमें विभाग द्वारा रजिस्टर्ड फर्म के नाम से प्रत्येक माह 35 हज़ार रुपए और 100 लीटर डीजल दिया जाता है जिसमें लगभग 25 हजार रुपए के करीब वाहन और 10 हज़ार रुपए ड्राइवर के लिए दिए जाते हैं। परंतु एसडीओ साहब की मनबढ़ई देखिए ज़रा वह सारे पैसे को हड़पने के चक्कर में अपनी प्राइवेट गाड़ी बलेनो जो कि पेट्रोल द्वारा संचालित वाहन हैं को विभाग की आंखों में धूल झोंक कर धडल्ले से एक फर्जी फर्म की आड़ में चलवा रहे हैं जो सीधे तौर पर विद्युत विभाग के नियमों की अवमानना हैं तथा एक आपराधिक कृत्य भी है क्यूंकि विभाग द्वारा हमेशा डीज़ल द्वारा संचालित वाहनों को ही विभागीय कार्यों में ईस्तेमाल करने की मंजूरी दी जाती है तथा निर्देशानुसार कोई भी अधिकारी अपने निजी वाहन को विभागीय कार्यों के लिए आने-जाने तथा विभाग का काम करने के लिए उपयोग नहीं कर सकता।


 


यदि पूर्व में या भविष्य में कोई हादसा होता या होगा तो क्या उसकी जिम्मेवारी एसडीओ किशन कुमार लेते या लेंगे। गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसडीओ किशन विभाग में अपने वाहन की सेवा देने के लिए पंजीकृत फर्म को प्रत्येक महीने 35 हजार रुपए दिलवा देते हैं जिसमें से फर्म का मालिक 5-6 हजार रुपए काट कर बाकी बचे पैसे एसडीओ किशन कुमार को दे देता है जिससे किशन कुमार विभागीय कार्यों के लिए प्रयोग में ला रहे अपने स्वयं के वाहन बलेनो की किश्तों को चुका देते हैं। दूसरी ओर विभाग की नजरों में प्रयोग में लाया जा रहा वाहन और उसकी भुगतान राशी पंजीकृत फर्म को जा रही होती है। नियमानुसार जिस गाड़ी को सरकारी काम के लिए प्रयोग किया जाता है वह गाड़ी फर्म के नाम से ही रजिस्टर्ड होनी चाहिए। यह पूरा मामला अधिशासी अभियंता राजीव आर्या के भी सज्ञान में है परंतु वह एसडीओ किशन कुमार के इस पूरे भ्रष्टाचारी खेल को देख कर भी चुप्पी साधे बैठे हुए हैं। 


 


उपरोक्त पूरे मामले की संक्षिप्त शिकायत ऑनलाइन व पत्र के माध्यम से केंद्र सरकार, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश तथा उर्जा मंत्री उत्तर प्रदेश से की जा रही है जिसमें देखना दिलचस्प होगा कि एसडीओ किशन कुमार और उनको अपना संरक्षण दे रहे अधिशासी अभियंता राजीव आर्या तथा विभाग में अपने वाहन सेवा देने के नाम से पंजीकृत फर्म के मालिक के विरुद्ध क्या कार्यवाही होती है।